Saturday, 3 January 2026

सोशल मीडिया के आईने में आतंक का असली चेहरा

🔍 परिचय

आज के डिजिटल युग में, आतंकवाद केवल बम और बंदूकों तक सीमित नहीं रह गया।
यह अब सोशल मीडिया के माध्यम से भी फैलता है — छद्म विचारों, भावनात्मक कहानियों और कूटनीतिपूर्ण भाषा के जरिए।


🗨️ महत्वपूर्ण निरीक्षण

मैंने आज तक ऐसा कोई मुस्लिम सॉफ्टवेयर इंजीनियर
(या किसी भी पेशे का मुस्लिम व्यक्ति) नहीं देखा,

जो रात-दिन सोशल मीडिया का उपयोग तो करता हो —
लेकिन आतंकवाद के खिलाफ एक भी पोस्ट  लिखता हो,
या आतंकवाद विरोधी किसी सामग्री को लाइक या शेयर  करता हो।

इसके बजाय, वैसा व्यक्ति हमेशा उलझाऊ, भावनात्मक या
छद्म घटनाओं पर आधारित कहानियाँ शेयर करता रहता है — जैसे:

  • “हिंदू उग्रवाद”

  • “Hindu Sangathan का षड्यंत्र”

  • “सरकारी भेदभाव”


❗ इस व्यवहार से स्पष्ट है

वह 100% जिहादी या आतंकवादी समर्थक है —
भले ही वह सीधे आतंकवाद की बात कभी न करे।


🧩 छद्म भूमिका

“दुश्मन के बीच रहकर, दुश्मन से पैसा कमाना”

ऐसे व्यक्ति का असली उद्देश्य कुछ ऐसा होता है:

  • ✅ जकात और अन्य धार्मिक चंदे से जिहादी प्रशिक्षण केंद्रों को वित्तपोषित करना

  • ✅ दुश्मनों (गैर-मुसलमान समाज) के बीच रहकर, उनके संसाधनों —
    नौकरी, शिक्षा, आर्थिक अवसर — का उपयोग करना

  • ✅ सोशल मीडिया पर “स्वतंत्र विचारक” की छवि बनाकर,
    जिहादी परिवार और समुदाय को संदेश देना:

“देखो, मैं जकात दे रहा हूँ और खुले में दुश्मन को उलझाकर काम भी कर रहा हूँ।”

⚠️ यही “दोहरा चेहरा” आधुनिक आतंकवाद की सबसे खतरनाक रणनीति है।


📊 जिहादी समर्थक की पहचान

विस्तृत बिंदु-आधारित मानदंड

नीचे दिया गया टेबल सोशल मीडिया व्यवहार के आधार पर
किसी व्यक्ति के रुख़ का विश्लेषण करने में मदद करता है।

क्रमांकपहचान का मानदंडसंकेत (हाँ/नहीं)अंक (Points)टिप्पणी
1क्या व्यक्ति सोशल मीडिया पर सक्रिय है?हाँ / नहींहाँ = 1निष्क्रिय खातों का मूल्यांकन नहीं
2क्या उसने कभी आतंकवाद के खिलाफ पोस्ट/लाइक/शेयर किया?हाँ / नहींनहीं = +3नैतिक स्थिति का अभाव
3क्या वह “हिंदू उग्रवाद”, “RSS षड्यंत्र”, “सरकारी भेदभाव” शेयर करता है?हाँ / नहींहाँ = +2ध्यान भटकाने की रणनीति
4क्या पोस्ट्स में “मार्शल लॉ”, “साजिश”, “जकात” जैसे शब्द हैं?हाँ / नहींहाँ = +2कोड भाषा
5क्या आतंकी हमलों के बाद वह चुप रहता है या उन्हें साजिश कहता है?हाँ / नहींहाँ = +3समर्थन से बचाव
6क्या वह शहादत या जिहाद प्रेरित सामग्री शेयर करता है?हाँ / नहींहाँ = +4सबसे गंभीर संकेत
7क्या वह एजेंसियों पर आरोप लगाता है लेकिन आतंकियों पर नहीं?हाँ / नहींहाँ = +2दोहरा मापदंड

📈 अंकों के आधार पर व्याख्या

कुल अंकमूल्यांकन
0–4🟢 सामान्य उपयोगकर्ता
5–8🟡 संदिग्ध व्यवहार
9–12+🔴 जिहादी / आतंकवादी समर्थक

📌 महत्वपूर्ण नोट
यह टेबल केवल सोशल मीडिया व्यवहार पर आधारित प्रारंभिक पहचान के लिए है।
कानूनी कार्रवाई के लिए आधिकारिक जाँच आवश्यक है।


💬 एक सरल प्रश्न जो सच्चाई उजागर कर दे

अगर कोई व्यक्ति लगातार sarkar,  या हिंदू संगठनों के खिलाफ पोस्ट करता है,
तो उससे सीधे पूछिए:

“9/11 के बाद दुनिया भर में 48,000 से अधिक आतंकी हमले हुए हैं।
इनमें से एक बार भी आपने आतंकवाद का विरोध क्यों नहीं किया?”

यदि उत्तर हो:

“मैं सोशल मीडिया पर ऐसी बातें नहीं लिखता…”

तो तुरंत पूछिए:

“फिर आप गरीबी, शिक्षा, sarkar के खिलाफ तो लिखते हैं?
क्या आपका सोशल मीडिया केवल दुश्मनों के खिलाफ के लिए है —
न कि आतंकवाद के खिलाफ?”

✨ इसी उत्तर से व्यक्ति का वास्तविक रुख़ स्पष्ट हो जाता है।


🧭 निष्कर्ष

🔥 आतंकवाद केवल हथियारों से नहीं —
बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध, छद्म पहचान और सूक्ष्म प्रचार से भी फैलता है।

एक व्यक्ति की चुप्पी आतंकवाद के खिलाफ —
और आवाज़ विभाजनकारी मुद्दों पर —
उसके वास्तविक एजेंडे को उजागर करती है।

✅ सच्चा स्वतंत्र विचारक वही है,
जो बुराई के हर रूप — चाहे वह BJP हो या ISI — की निंदा कर सके।



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